खबर थी उसे
चाँद, तारे,आकाशनदिया,बदल,बारिश, झरनेफूल,भँवरे,पंछी,पेड़क्यों बनाये उस रहबर नेशायद खबर थी उसे की एक दिन जब किसी वक़्तसपनो सी इस दुनिया में किसी शक्स को सच दिखेगा, चुभेगा, चोट करेगा तब वो कुदरत की आगोश में कल्पना की चादर लेकर कुछ पल पैर पसारकरनींद की एक...
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himani
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[22 Mar 2010 08:51 AM]



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