ढूँढता हूँ, इक मयखाना...

उदास आँखों का ख्वाब ढूँढता हूँ, इक मयखाना यहीं कहीं था छलकता हुआ पैमाना यहीं कहीं था लोग आते थे सजदे को दूर-दूर से सुना है - इक बुतखाना यहीं कहीं था जिंदगी से ऊबकर आता था मैं जहाँ वो मेरा ठिकाना यहीं कहीं था कोई पूछे तो कहते थे लोग हाँ, एक दीवाना यहीं कहीं था अभी-अभी रोया... [पूरी पोस्ट]
writer क्षितीश
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[22 Mar 2010 08:54 AM]

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