महज एक बच्चे की ताली पर: एक बहस जिसका जवाब प्रभाष जी ने नहीं दिया

हाशिया यह लेख प्रभाष जोशी के लेख 'काले धंधे के रक्षक' के छपने के तुरंत बाद लिखा गया था, लेकिन प्रभाष जी की जिद थी कि वे इंटरनेट पर आयी बातों का जबाव नहीं देंगे। प्रिंट में आये तभी बोलेंगे।  इसलिए इसे उस समय इंटरनेट के लिए नहीं दिया गया. जब जनसत्ता ने इसे... [पूरी पोस्ट]
writer Reyaz-ul-haque

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[22 Mar 2010 07:26 AM]

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