एक नाज़ुक सी लड़की
एक नाज़ुक सी लड़कीनर्म सा एक दिल थाशर्म उसका सिंगार थाकर्म मैं ही जीवन थाधर्म मैं मिलता सकून थाएक नाज़ुक सी लड़कीआँखों मैं सपने थेआशाओं के गुल्दास्ते थेसब को खुश रखने के अरमान थेआस्मां को चुहने के इज़हार थेएक नाज़ुक सी लड़कीसच का रास्ता ही अपना थाहर इंसान रब का...
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Nirbhay Jain
पिंकी वालिया
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[22 Mar 2010 07:24 AM]



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