हादसा

मुरादाबादी अड्डा रोज होते है,हादसे.शहर में,चोराहो पर, सड़क पर.हो जाता है भयावह माहोल वहां पर.होती है चीख-पुकार हर तरफ.हम भी देखते हैं अक्सर ये मंजर.और चल देते हैं,'बहुत बुरा हुआ ' कहकर .क्योकि हमे है जल्दी अपनी मंजिल पर पहुचने की.हमे नहीं है फुरसत वहां पर मदद करने की.नहीं... [पूरी पोस्ट]
writer अंकुर कुमार 'अश्क'

कविता

views
19
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[22 Mar 2010 07:23 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix