आदिवासियों की संघर्ष कथा
उनकी कहानियां हों, या कविताएँ या उपन्यास- रणेंद्र अपने लेखन में जनता के सरोकारों से अभिन्न रूप से जुड़े दिखते हैं. खास कर आदिवासी समुदाय की पीड़ा, उसका विस्थापन और उसका संघर्ष उनके लेखन में अधिक मुखर होता है.उनका ताजा उपन्यास ग्लोबल गांव के देवता पढ़िए....
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Reyaz-ul-haque
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[22 Mar 2010 07:14 AM]



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