ग़ज़ल :हज़ारों लब से आती है सदा ये .
ग़ज़ल :हज़ारों लब से आती है सदा ये ....[यह ग़ज़ल जनाब पी०के०स्वामी ,नई दिल्ली ने मोहतरम शायर जनाब "सरवर" की शान में उनके जन्म दिन (१६-मार्च) पर कही है यह ग़ज़ल इस ब्लाग पे इस मक़्सद से लगा रहा हूँ कि अहलेकारीं भी इस ग़ज़ल की ख़्सूसियत और नाज़ुक ख़याली से लुत्फ़अंदोज़...
[पूरी पोस्ट]
आनन्द पाठक
13
1
0
1
0
[22 Mar 2010 02:36 AM]



Shuffle








