वो जिद पे अड़ा है

कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में वो जिद पे अड़ा है वो सबसे बड़ा है मुद्दत से यही तो वो दोहरा रहा है दुनिया का बोझ लिए अपने दिमाग पर अपने ही घर को भूला जा रहा है बात करता है हरदम वो मजहब खुदा कीइंसानियत तो उसको याद ही नहीं है चुन चुन कर निशाना वो साधे हुए है किसी की सुनने कोतैयार ही नहीं... [पूरी पोस्ट]
writer Sonal Rastogi

सहिष्णुता

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[22 Mar 2010 05:44 AM]

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