जिन्दगी में बढ़ता तनाव और आतम हत्या
अनिल पुसाद्कर जी के लेख आतम हत्या को पढ़कर सचमुच मन सोचने को मजबूर हो गया है की आखिर क्या क्या कारन हो सकते हैं की एक आदमी आतम हत्या के रस्ते को चुनता हैं.क्यों उसको ऐसा लगने लगता हैं की उसके लिए इस दुनिया में जीना मरने से भी मुस्किल हो गया ...
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SANJEEV RANA
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[22 Mar 2010 05:18 AM]



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