कल्पना - नए जहाँ की !
आओ रचें एक विश्व ऐसा, एक लक्ष्य से जुड़ें सभी, व्योम के विस्तार सा,संसृति के विचार सा संयमित एक आचार सासंतुलित व्यवहार सा,हो विश्व एक परिवार सा.यत्न करें संग-संग चलें,संयुक्त ही सब प्रयत्न हों,धीर धर के निपट लेंयक्ष प्रश्नों से सभी,उत्तर...
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रेखा श्रीवास्तव
परिवार
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[22 Mar 2010 05:01 AM]



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