इसलिए कविता करना चाहता हुँ मैं,

माथापच्ची ( मेरे मन की उथल पुथल ) आखिर क्यो कविता करना चाहता हुँ मैं, किसको और क्या बताना चाहता हुँ मैं ।“शब्द-ज्ञान” मे कच्चा हुँ, सब पकड लेगे, फिर भी महफिल क्यो सजाना चाहता हुँ मैं।आखिर क्यो कविता करना चाहता हुँ मैं, किसको और क्या बताना चाहता हुँ मैं ।मेरी “सांसारिक नाकामयाबियाँ” नही... [पूरी पोस्ट]
writer Kapil Dev Sharma
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[22 Mar 2010 04:51 AM]

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