जाने कहां गये वो गीत!
मोहल्ला से एक पुरानी पोस्ट का पुनर्प्रकाशनइरफान भाई दोस्त हैं। उनकी शख्सीयत का एक पहलू नहीं है। वो आंदोलनी रोज़मर्रे से शुरू होकर आज हर उस फ़न के माहिर हैं, जो सामने वाले को चमत्कार लग सकता है। अच्छी पेंटिंग, अच्छे विचार, अच्छी आवाज़ और उम्दा...
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इरफ़ान
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[22 Mar 2010 03:11 AM]



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