अतीत

world of dream सीसे के मानिंद टूटते हुएअतीत को देखा मैंने अपने सामने हीपहले घर से समुदाय,समुदाय से गावं बनते थेपर अब तो राज्य से राज्यदेश से देश घर से घर बनते हैंकहाँ गया वो अतीत?शायद वह भी अतीत ही बन गयाबिना गुजरे हुए मेरे सामने सेसंयुक्त परिवार कल्पना बन गया रह गईं... [पूरी पोस्ट]
writer राहुल पंडित
views
11
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[22 Mar 2010 02:37 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix