अतीत
सीसे के मानिंद टूटते हुएअतीत को देखा मैंने अपने सामने हीपहले घर से समुदाय,समुदाय से गावं बनते थेपर अब तो राज्य से राज्यदेश से देश घर से घर बनते हैंकहाँ गया वो अतीत?शायद वह भी अतीत ही बन गयाबिना गुजरे हुए मेरे सामने सेसंयुक्त परिवार कल्पना बन गया रह गईं...
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राहुल पंडित
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[22 Mar 2010 02:37 AM]



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