मिनखां री माया
आप बूझ्यो,जे मिनखइण भौम माथै नीं हुवैतोकांई फरक पड़ै ?ठा नीं थानै सुण्यो कै नीं सुण्योम्हैं साफ कैयो है कैफरक क्यूं नी पड़ै , पड़ै सामिनख नीं होंवतो तोकठै सूं होंवता नित नुंवा प्रयोगआभै नै नापण री सगतिचांद माथै घर बसावण री ताकतपांणी नै भेदण री...
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दुलाराम सहारण
राजस्थानी कविता
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[22 Mar 2010 00:37 AM]



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