गले में बंधी घंटी की रूनझुन सुन कर समझ में आ जाता था कि.....

फतेहपुर आन और सान का प्रतीक हाथी अब नहीं दिखता है। कभी गांवों नगरों में बहुतायत में दिखने वाले गजराज गायब हो रहे हैं। कभी शादी विवाहों की शान बनने वाला अब गाहे बगाहे दिखना भी बंद हो रहा है। एक समय था जब दरवाजे पर बंधा हुआ हाथी हैसियत का जीता जागता नमूना होता था।... [पूरी पोस्ट]
writer प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI

फतेहपुर

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[21 Mar 2010 21:12 PM]

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