ग़ज़ल- दिल में ऐसे उतर गया कोई
दोस्त बन कर मुकर गया कोई अपने दिल से यूँ डर गया कोईआँख में अब तलक है परछाईंदिल में ऐसे उतर गया कोईसबकी ख़्वाहिश को रख के ज़िंदा फिरख़ामुशी से लो मर गया कोईजो भी लौटा तबाह ही लौटाफिर से लेकिन उधर गया कोई"दोस्त" कैसे बदल गया देखोमोजज़ा ये भी कर गया कोई...
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मानसी
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[21 Mar 2010 17:20 PM]



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