यो हो हो हो

I'm Vikash & this is my world...! बहुत देर तक वह उस अधलिखी कविता को ताकती रही. कब और कैसे जीवन इस ओर घूम गया, इस बात का अफ़सोस नहीं होने का अफ़सोस उसे खाये जा रहा था. अब अपना चेहरा भी अनजाना सा लगता है.आईने के अंदर की औरत मैं हूँ -का विश्वास शीशे की तरह टूट गया लगता है. अंदर से मुझे घूर... [पूरी पोस्ट]
writer विकास कुमार
views
21
upvote
4
downvote
0
rating
4
comments
5
[21 Mar 2010 16:38 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix