उथले हैं वे जो कहते हैं

अमिताभ किसी भी साहित्यिक रचना या रचना संग्रह को इमानदारी से पढने वाला पाठक अगर मिल जाता है और वो उस रचना पर अपनी राय भी व्यक्त कर देता है तो यह सोने पे सुहागा हो जाता है। उस संग्रह को फिर किसी दूजे पुरस्कार आदि की आवश्यकता ही नहीं होती। मेरे पूज्य पिताजी डॉ. जे... [पूरी पोस्ट]
writer अमिताभ श्रीवास्तव

रागानुगा

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[21 Mar 2010 14:28 PM]

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