मेरे गाँव की कहानी : तीन - मछली-भात और नींबू के पत्ते
अरविन्द चतुर्वेद :एक समय वह भी था कि वर्षा-जल से नहाए जंगल से होकर जब पुरवा हवा चलती थी तो भीगी वनस्पितियों की मादक महक के झोंके गांव तक आते थे। बरसात ही नहीं, हर मौसम में इस गांव की जिंदगी की निगाहें सहज रूप से पूरब जंगल की ओर उठती थीं, लेकिन जबसे जंगल...
[पूरी पोस्ट]
अरविन्द चतुर्वेद
18
0
0
0
2
[21 Mar 2010 12:19 PM]



Shuffle








