है अनूठी साधना यह अनवरत वर्षों चलेगी...

Kuchh kahi kuchh unkahi है अनूठी साधना यह अनवरत वर्षों चलेगी,कर्मजीवी की तपस्या से धरा प्रतिफल पलेगी।साध्य साधक साधना मिलकर सब लक्ष्य साधें,मौन के मुखरित स्वरों से वासना का बाँध बांधे। ये ज़मीं और आसमां जाकर जहाँ पर एक होंगे,शायद वहीँ पर सभी को जीने के अवसर मिलेंगे।बढ़ चलो खोजें... [पूरी पोस्ट]
writer Nihar Khan
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[21 Mar 2010 11:42 AM]

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