कली को खिलने दो

खुद पर है यकीं छू लेंगे आसमां मेरी तरह आपका भी दिल चाहता होगा कि घर के किसी कोने में कोई बगिया हो...उसमें अलग-अलग रंगों के ढेरों फूल मुस्कुराते नजर आए...रोजाना एक नई कली खिले और फूल बने...ताकि घर का कोना-कोना महक उठे...घर का हर सदस्य उनकी महक का आदी हो जाए...बारिश, आंधी या तूफान में... [पूरी पोस्ट]
writer विश्वनाथ सैनी
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[21 Mar 2010 11:27 AM]

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