देह की बात
देह की बात हो तो कहे भी कोईमन की तकलीफ का ज़िक्र क्या कीजिये सांस एक डोर है फड़फड़ाती हुई जोर से खींचिए फिर उड़ा दीजिए.फागुनी गंध-सा टीसता है ये मनइन कुंवारी हवाओं का स्पर्श कर स्नेह की आखिरी बूँद तक किस...
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prkant
देह
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[21 Mar 2010 10:43 AM]



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