शेरशाह सूरी के घोड़े
मेरी स्मृति मेंअब भी दौड़ते हैंशेरशाह सूरी के घोड़ेघोड़ों की पीठ पर सवार जांबाजजांबाज की पीठ पर कसा चमढ़े का थैलाचमढ़े के थैलों में भरी ढ़ेर सारी चिट्ठियांजमीन पर सरपट दौड़ते ये घोड़ेजंगल-पहाड़-बीहड़ों को लांघते नदी-तालाब-नालों को फांदतेजा पहुंचते है उस गांव...
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डाकिया बाबू
कविता
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[21 Mar 2010 09:06 AM]



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