इतनी धुंध कभी न थी कि डूब जाएँ उसमे मकान सारे

Bhagyoday organic इतनी धुंध कभी न थी कि डूब जाएँ उसमे पेड़ कि डूब जाएँ उसमे मकान सारे कि डूब जाएँ पहाड़ और नदियाँ कि रास्ता बिलकुल दिखाई न दे कि भटक जाएँ शहर के लोग इधर उधर कि भटकते हुए पहुंचेएक सदी दुसरे सदी तक इतनी धुंध कभी न थी कि अगर आप लिखे किसी को ख़त तो वह पढ़ा न... [पूरी पोस्ट]
writer Bhagyoday
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[21 Mar 2010 06:53 AM]

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