"दुआ"
वक्त के चलने का सारा खेल है, जब ज़िन्दगी ,कैसे हो सकता है भला, खुशिया हों पर गम न हो,ज्यादा क्या मांगू मैं तुझसे, तूने ख़ुदा सब है दियाइतना कर एहसान...
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Yogesh Sharma
"दुआ"
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[21 Mar 2010 05:53 AM]



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