इनकार करती हूँ
चलो तुमको यकीं तो हुआ कि मैं इसमें तनहा मुजरिम नहीं थीकुछ हालत थे कुछ मजबूरी थी बेवफाई मेरी फितरत में शामिल नहीं थी चाहती तो पहले भी बता सकती थी तुम्हे अपनी मजबूरी कि भी लम्बी कहानी थी पर तब शायद तुमको यकीं नहीं आता मेरी बेगुनाही ज़माने पर ज़ाहिर नहीं थी...
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Sonal Rastogi
हिन्दी पोएम
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[21 Mar 2010 05:16 AM]



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