चोट
चोट ताज़ा है अभी , थोडा मुस्कुराने दो !वकत लगेगा अभी ,दर्दे दिल सुनाने को !गुमा नहीं था, इस कदर चोट खायेंगे ,ठगे से रह गए , बस तिलमिलाने को !लम्हें चुनने दो , ख्यालों के खंज़र से ,लुटे हैं कितने , हिसाब तो लगाने दो !जितने चाहो , किस्से बुनते रहना ,सच...
[पूरी पोस्ट]
sanjeev kuralia
चोट
13
0
0
0
2
[21 Mar 2010 04:47 AM]



Shuffle








