भाग-१, भाग-२, भाग-३, भाग-४, भाग-५ से आगे ..........." आगे क्या बात हुई , मैं तो सुन ही नहीं सका और लड़खड़ा कर गिर पड़ा | जब होश में जागृत हुआ तो दोनों मुझ पर झुके हुए थे | महाराणा की एक कातर पंक्ति मुझे अभी तक याद है - " विधाता ! तुमने मुझसे क्या नहीं" />

चेतक की समाधि से -6

Shri Tan Singh, Badmer ">भाग-१, भाग-२, भाग-३, भाग-४, भाग-५ से आगे ..........." आगे क्या बात हुई , मैं तो सुन ही नहीं सका और लड़खड़ा कर गिर पड़ा | जब होश में जागृत हुआ तो दोनों मुझ पर झुके हुए थे | महाराणा की एक कातर पंक्ति मुझे अभी तक याद है - " विधाता ! तुमने मुझसे क्या नहीं... [पूरी पोस्ट]
writer क्षत्रिय

स्व.श्री तन सिंह जी कलम से

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[21 Mar 2010 04:43 AM]

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