"तन्हाई"
तन्हाई में पर्दों के बस सहारे हैं ,इनको देख कर ही दिन गुज़ारे हैं,दीवार से घड़ियाँ उतार दीं सारी,वक्त से रिश्ते न अब हमारे हैं,सामने आता है एक ही चेहरा,हमने कितने...
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Yogesh Sharma
"तन्हाई"
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[21 Mar 2010 02:31 AM]



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