"मेरा विद्यालय" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")
विद्या का भण्डार भरा है जिसमें सारा।मुझको अपना विद्यालय लगता है प्यारा।।नित्य नियम से विद्यालय में, मैं पढ़ने को जाता हूँ।इण्टरवल जब हो जाता मैं टिफन खोल कर खाता हूँ।खेल-खेल में दीदी जी विज्ञान गणित सिखलाती हैं।हिन्दी और सामान्य-ज्ञान भी ढंग से हमें...
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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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[21 Mar 2010 02:41 AM]



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