उल्के

मौन के खाली घर मे-                                       ओम आर्य आजकलये ताराटिमटिमाता रहता है अकेलाअभी कुछ रोज पहले तकदेखता था इसेचाँद के बहुत क़रीबउसकी मुलायम चाँदनी में नहाते हुएडर हैचाँद जब तक लौट कर आएये ताराकहीं उल्के में न बदल जाए... [पूरी पोस्ट]
writer ओम आर्य
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[21 Mar 2010 01:40 AM]

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