"कारवां"
मैं चला तो था सफ़र में, कारवां के साथ साथ,थे कहीं कन्धों पे बाहें, और कहीं हाथों में हाथ,रास्ते में जाने कैसे, साथ हर छुटता गया,वक्त गुज़रता गया, काफिला घटता गया,कुछ मेरी तेज़ी से न चल पाए, पीछे रह गए, कुछ के क़दमों की, बड़ी तेज़ ही रफ़्तार थी ,कुछ...
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Yogesh Sharma
"कारवां"
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[21 Mar 2010 01:18 AM]



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