गर प्यार से छू ले
आज भी सिहर जाए रोम रोमगर तूप्यार से छू ले मुझेआज भीडूब जाऊँ नैनों की मदिरा में गर तूनज़र भर देख ले मुझेआज भी बंध जाऊँबाहुपाश में तेरे गर तूस्नेहमय निमंत्रण दे उर स्पन्दनहीननहीं हैबस नेह जल...
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वन्दना
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[21 Mar 2010 01:07 AM]



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