क्या कोई सुन रहा है...
क्या सुन रहा है कोई...कि जहर को जहर ही काटता है, काँटे को काँटा ही निकालता है....पूजास्थल निर्माण के ख्वाब दिखाके ठगता है कोई,धर्म पर खतरे के नाम पर बरगलाता है कोई,धर्म-गुरू के कपडे पहनने पर लोगो को मरवाता है कोई,परिवर्तित के मरने पर अलग जगह पर दफनाता है...
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Kapil Dev Sharma
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[20 Mar 2010 23:44 PM]



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