तेजी से कांक्रीटमय होती शहरी धरती में कहीं कोई पेड भी है जिसे मैंनें लगाया है.
पिछले वर्ष मेरे घर के आम के पेड में कुल जमा दो आम फले थे तब यह आम एक पोस्ट इस आम में क्या खास है भाई .... ? बनकर खास हो गया था और इसका जिक्र प्रिंट मीडिया में भी हुआ था. और हम अतिप्रशन्न हो गए थे कि चलो अब घर के दरवाजे-खिड़की-चौखट के संबंध में...
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संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari
गद्य कविता
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[21 Mar 2010 00:12 AM]



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