जगह मिलती है हर इक को कहां फूलों के दामन में
किसी को दुख नहीं होता, कहीं मातम नहीं होताबिछड़ जाने का इस दुनिया को कोई ग़म नहीं होताजगह मिलती है हर इक को कहां फूलों के दामन मेंहर इक क़तरा मेरी जां क़तरा-ए-शबनम नहीं होताहम इस सुनसान रस्ते में अकेले वो मुसाफिर हैंहमारा अपना साया भी जहां हमदम नहीं...
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फ़िरदौस ख़ान
ग़ज़ल
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[20 Mar 2010 21:53 PM]



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