कविता: चिर पिपासु -आचार्य श्यामलाल उपाध्याय
कविता:चिर पिपासुश्यामलाल उपाध्यायचिरंतन सत्य के बीचश्रांति के अवगुंठन के पीछेचिर प्रतीक्षपन्न निस्तब्धनिरखता उस मुकुलित पुष्प कोऔर परखता उस पत्र कानिष्करुण निपातजिसमें नव किसलय केस्मिति-हास की परिणतितथा रोदन के आवृत्त प्रलाप.निदर्शन-दर्शन के...
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आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
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[20 Mar 2010 15:53 PM]



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