नि‍राशा के पार...

कुछ बातें... न जाने क्‍यों आज मन रुआंसा सा हैरोने को दि‍ल तो चाह रहा हैपर आसूं हैं कि आंख से नीचे ही नहीं उतर रहेबहुत कसैला हो गया है मनजैसे नीम की पत्‍ति‍यां चबाई हों याखाया हो कच्‍चा करेला मैनेबहुत घुटन हो रही है आजजैसे कि तंग में कमरे में बंद हो गया हूंबि‍ना... [पूरी पोस्ट]
writer भारत मल्‍होत्रा
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[20 Mar 2010 15:53 PM]

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