शायद इसी को दुर्भाग्य कहते हैं………

अधूरा सपना पिछली बार जो हुआ, कबूल लिया कि अपनी बेवकूफी थी जो भिखारिन को 2 रूपये दे दिये और दूध खरीदने के लिए लिए 2 रूपये कम पड़ गये। लेकिन इस बार तो बाकायदा एक सौ रूपये की नई नोट लेकर निकले थे, ये अलग बात है कि वापस आते आते वह नोट चंद सिक्के में बदल गयी। इस बार दो... [पूरी पोस्ट]
writer Manish
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[20 Mar 2010 15:51 PM]

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