रिश्ते भी चलचित्र बनें हैं दुनिया में--------(विनोद कुमार पांडेय)
जिनके चरण,आचरण दोनों दूषित हैं,देखो वहीं पवित्र बनें हैं दुनिया में,जिस मूरत पर श्रद्धा से सर झुक जाता है,उनके भद्दे चित्र बनें हैं दुनिया में,मेरी आँखों में आँसू वो हँसते है,ऐसे ऐसे मित्र बनें हैं दुनिया में,एक दिखावा,एक छिपा कर रखते हैं,सबके अलग चरित्र...
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विनोद कुमार पांडेय
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[20 Mar 2010 12:47 PM]



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