एक बार फिर आ गौरैया

स्वप्नलोक एक बार फिर आ गौरैयातेरी बहुत याद आती हैयूँ तो रूठ न जा गौरैयाबचपन की यादों में शामिलतेरे बिन वे यादें बोझिलतेरे दर्शन को बेकल दिलसूरत जरा दिखा गौरैयाएक बार फिर आ गौरैयातेरे पीछे धमाचौकड़ीकतना के नीचे रख लकड़ीएक बार धोखे से पकड़ीअब वह खता भुला गौरैयाएक बार... [पूरी पोस्ट]
writer विवेक सिंह
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[20 Mar 2010 12:38 PM]

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