…कविता का मसौदा और विश्व गौरैया दिवस
मैं पिछले कई दिन से कविताई के मूड में हूं। कविताई के मूड में मतलब कविता लिखने के मूड में। सब मसाला भी सोच रखा है और हर पल लगता है कि बस अब हुआ तब हुआ। कविता निकाल ही देनी चाहिये। अब और देरी ठीक नहीं। वैसे भी अगर कोई पोस्ट(लेख)लिखने का मसौदा [...]...
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फ़ुरसतिया
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[20 Mar 2010 10:22 AM]



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