बांहों में भर ले बलम हरजाई

साहित्य-सहवास जाड़े का मौसम, छोटी रजाईबांहों में भर ले बलम हरजाईननद निगौड़ी बाज़ न आएदरवज्जे पर कान लगाएसरका दे खटिया, बिछाले चटाई .............बांहों में भर ले ...........तू मेरा राजा, मैं तेरी रानीअब काहे की आना-कानीकाहे का डरमैं हूँ तेरी लुगाई .........बांहों में भर... [पूरी पोस्ट]
writer AlbelaKhatri.com
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[20 Mar 2010 11:09 AM]

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