मेरे गांव की कहानी- दो : कलहवा गांव में कत्ल

यार कहानी अरविंद चतुर्वेद :मेरे गांव का नाम कलहवा गांव इसलिए, क्योंकि बाभनों में पटूटीदारी की लाग-डांट बराबर बनी रहती थी और बात-बात पर गाली-गलौज के साथ लाठियां निकलती रहती थीं। यह कलह तीन बार जब अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंची तो रामप्यारे चौबे, रामखेलावन चौबे और कुबेर... [पूरी पोस्ट]
writer अरविन्द चतुर्वेद
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[20 Mar 2010 11:09 AM]

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