बजी कहीं शहनाई सारी रात : बिस्मिल्ला खां का जन्मदिन

जनपद अरविंद चतुर्वेद :प्रगाढ़ प्रेम की बेचैनी भरा कवि रमानाथ अवस्थी का एक गीत है- सो न सका कल याद तुम्हारी आई सारी रात।और पास ही बजी कहीं शहनाई सारी रात...।क्या पता आज किसी के मन में जल तरंग बजता है या नहीं, या फिर किसी की याद में वायलिन की उदास धुन बेचैन करती... [पूरी पोस्ट]
writer अरविन्द चतुर्वेद
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[20 Mar 2010 10:36 AM]

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