मुझसे बंधन क्यों बांधा था जो मेरा विश्वास नहीं था ?

अमाँ यार..... मुझसे बंधन क्यों बांधा था जो मेरा विश्वास नहीं था ?चार दिवस ही बीते हमको पास विह्वलता से आए एक दूजे का ह्रदय टटोला संग-संग सकुचे मुस्काए तेरी इस निर्ममता का मुझे कोई आभास नहीं था मुझसे बंधन क्यों बांधा था जो मेरा विश्वास नहीं था ? तुमको अपने मन की बात... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु बाजपेयी
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[20 Mar 2010 07:34 AM]

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