एक टिप्पणी, एक लेख .....................घुघूती बासूती
इस लेख में बहुत कुछ जोड़ भी सकती हूँ किन्तु वह फिर कभी। यह बस यूँ ही नारी पर टिपियाते हुए (स्त्री के मन से अनायास निकला हुआ) कह दिया। जोड़ने को माँ के साथ हुए अनगिनित वाद विवाद व वार्ताएँ हैं, हजारों वे बातें हैं जो आज तक अनकही रह गईं। कहने पर उलाहने मिलने...
[पूरी पोस्ट]
Mired Mirage
स्त्री विमर्श
88
7
0
7
18
[20 Mar 2010 06:25 AM]



Shuffle








