ख़ूब कही.....!

डॉ. चन्द्रकुमार जैन जीवन हमें जो ताश के पत्ते देता है,उन्हें हर खिलाड़ी को स्वीकार करना पड़ता है।लेकिन जब पत्ते हाथ में आ जाएँ,तो खिलाड़ी को यह तय करना ही होता है किवह उन पत्तों को किस तरह से खेलेकि.....वह बाज़ी जीत... [पूरी पोस्ट]
writer Dr. Chandra Kumar Jain
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[20 Mar 2010 06:34 AM]

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