‘‘टेली-विजन’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
मेरा टी0वी0 है अनमोल।खोल रहा दुनिया की पोल।।इसमें चैनल एक हजार।इसके बिन जीवन बेकार।।कितना प्यारा और सलोना।बच्चों का ये एक खिलौना।।समाचार इसमें हैं आते।कार्टून हैं खूब हँसाते।।गीत और संगीत सुनाता।पल-पल की घटना बतलाता।।बस रिमोट का बटन दबाओ।मनचाहा चैनल पा...
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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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[20 Mar 2010 04:23 AM]



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