किसी नारी के संग सिनेमा जाने का दिल करता है !

लाइट ले यार ! अपने किशोरावस्था के दिनों की यादें, लगभग बीस साल पहले लिखी इस हास्य रचना के जरिये ताजा हो  जाती हैं , आपको मुस्कराने हेतु नज़र है !सोचता था बचपन से यारबड़ा कर दे जल्दी भगवानमगर अब बीत गए दस सालजवानी बीती जाये यार ,किसी नारी के संग सिनेमा जाने का दिल... [पूरी पोस्ट]
writer सतीश सक्सेना
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[20 Mar 2010 02:17 AM]

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